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Kapitlar

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    एक मन ब्रह्म में एक ब्रह्मन में तेरा मेरा एक वो ब्रह्म हर रहा हूँ जो गागर में है वो ही सागर में है सागर कहे मैं भी कभी गागर रहा हूँ काया मिटी और मिटी काया है भगवान कहे मैं हिर फिर कर रहा हूँ