Bhondu_ki_katha._भोंदू_की_कथा_by_Indresh_Upadhyay_ji_@BhaktiPath_#krishna_#katha_#video_#bhakti_#ai(256k)

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Oversigt

The transcript describes a man who was staying in a hut and was visited by a guru who taught him about the importance of devotion and pranayama. The guru also taught him about the importance of the man's name and the guru's name, and the man was taught to pray and meditate.

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Kapitel

  1. 0:00

    एक भौंदू रहता था पर वो इतना सीधा था कि सब प्यार से उसको भौंदू भिलाते थे गायों की सेवा करता था और जिस आश्रम में रहता था वहां के गुरुदेव शाम को प्रवचन करते थे तो सब से पीछे बैठ के सुनता था भौंदू को लगता था गुरुजी � जो बोलने यह बिल्कुल सत्य है…

  2. 5:01

    ठाकुर जी ने भड़िया रोटी ऐसे गुमाई और प्रेम से गुड़ खाम है और रोटी पान लगे प्रेम ते और ठाकुर जी तो चप चप करके नेक दिर में पागे भोंदू तो भूली कि ओम खानों भी ओ ठाकुर जी खोई देख रहा है ठाकुर जी बोले और जोर की भ� मिलूंगो कल भी तोते ठाकुर जी अपने…

  3. 10:10

    परहा रहे पार रहे था है ग्षाथ को यह दो यह भी गुरुजीू की यह ठाव और सुनोटने हमारे गुडु से आपको पढ़़ agra को आप से प्रेम नहीं है कलते अपनी गयान को लेकर कहीं और चरावे जाओ होंगे तुम नंदन अपने गाम के मेरे गुरुजी के पास नहीं जाओगे और सुनो यह मौमेज …