VOCALS Jadui Ghoda Aur Dhairya Ki Seekh

15:27 3 发言者 3 章次 章 次 41 分部分会议

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    जादूई घोडा और धैरे की सीख ये कहानी राजकर नगर की है, जहांके राजा रगुवर सिंग के पुत्र मोहन सिंग स्वभाव से घमंडी और छोटी सोच वाले थे, वो हमीशा अपने फायदे के बारे में सोचते थे, चाहे इससे दूसरों को कितना ही नुकसान क्यों नहो, उन्हें सिर्फ अपनी जी…

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    章章章 章章 章 次 第一章 章 第一章 一章 2: एक घोड़ा ही तो लाना है ये काम तो मैं चुटकियों में कर सकता हूँ पिताजी जिस घोड़े की बात हो रही है वो भी मेरी वीरता देखकर खुद सामने आजाएगा मोहन भले ही तुम इस राज्य के राजकुमार हो परंतु राज्य की सीमाओं से बाहर तुम भी एक आम व मोहन रगुवर सिंग की बातों को अंसुना करके चला जाता है। अतियात्म विश्वास और एंकार को भर कर मोहन राज्य से रवाना हो गया। राज्य की सीमा पार करते ही घना जंगल शुरू हो गया। रास्ता कठिन और फिसलन भरा था। कुछ ही दूर पर उसके सैनिक दल द राजकुमार कृप्या हमारी मदद कीजिए ये दलदल बहुत गहरा है हमारे पैर धंसते जा रहे हैं अगर समय रहते बाहर नहीं निकले तो शायद हम सब जिन्दा ना बचे आप हमें अकेला मत छोड़िये हमारी जान आपकी एक सहायता पटे की है मैं यहाँ घोडा लेने आया हूँ ना कि तुम्हारी देख भाल करने सैनिक हो, खुद संभलो मोहन सैनिको को मुश्किल में छोड़ कर अकेला निकल गया उधर राजा रगुबर सिंग का स्वास्थय कमजोर था जिससे वे फैसले नहीं ले पा रहे थे मंत्री आपस में उलज � क्या ये वही राजगड है जिसे मैंने वर्षों तक प्रेम और नयाय से सीचा था क्या अब समय आ गया है राज्य को एक नया रूप देने वाला कोई और सही उत्तरादिकारी का चुनाव करने का माहराज निराश मत हो ये हर रात के बाद सुभा होती है मोहन ने भले अभी तक अपने कर्तव्यों को नहीं पैचाना, परंतु वो हमारा बेटा है, और मैंने हमीशा उसमें कहीं न कहीं अच्छाई की चेंगारी देखी है। रानी सुमित्रा की बातों से राजा रगुवर सिंग को तसली मिल गई, जिसके बाद उन्होंने कोशिश कर महराज, हमसे बहुत बड़ी भूलो गई हमें लगा कोई हमारा दुख नहीं समझता उस्से में जो कहा उसके लिए क्षमा चाहती हूँ कमला मैं तुम्हारी परिशानी समझ सकती हूँ हमें राजकुमार मोहन की गलती का एहसास है राजा रखवर सिंग और सुमित्रा की बातों से प्रजा थोड़ी शांत हुई और रा� उधर जंगल में चलते चलते मोहन भूख, प्यास और ठकावट से बेहाल हो गया. 319s · Speaker 1

    एक घोड़ा ही तो लाना है ये काम तो मैं चुटकियों में कर सकता हूँ पिताजी जिस घोड़े की बात हो रही है वो भी मेरी वीरता देखकर खुद सामने आजाएगा मोहन भले ही तुम इस राज्य के राजकुमार हो परंतु राज्य की सीमाओं से बाहर तुम भी एक आम व मोहन रगुवर सिंग की …

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    परंतु असली शक्ति अपने स्वार्थ पर विजय पाने में है। राजा वो नहीं जो ताज पहनता है। राजा वो है जो जनता का दुख अपनी आत्मा में महसूस करता है। उनकी भावनाओं को समझता है। काटों में बुरी तरह भसा तड़प रहा था, पहले उसने सिर घुमा लिया, जैसे ये कोई मामू…