ማሳየት ብቻ
0:00
S… Speaker 1 (0908)
एक समय की बात है,
0:01
S… Speaker 1 (0908)
प्रातह काल का समय था,
0:02
S… Speaker 1 (0908)
आचार्य चानक के चंद्रगुप्त से गंभीर स्वर में बोले,
0:06
S… Speaker 1 (0908)
हे चंद्रगुप्त,
0:07
S… Speaker 1 (0908)
क्या तुम जानते हो कि मनुष्य और पशु में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
0:11
S… Speaker 1 (0908)
चंद्रगुप्त ने विनम्रता से कहा गुरुदेव मनुष्य के पास बुद्धी
0:15
S… Speaker 1 (0908)
है और पशु के पास केवल बल आचार्य चानक के मुस्कुराय और बोले
0:19
S… Speaker 1 (0908)
तुमने आधा सत्य समझा है बुद्धी मनुष्य के पास है लेकिन
0:23
S… Speaker 1 (0908)
केवल बुद्धी होना परियाप्त नहीं है आचार
0:36
S… Speaker 1 (0908)
बैल मनुष्य से अधिक बलवान है,
0:38
S… Speaker 1 (0908)
हाथी मनुष्य से कई गुना शक्तिशाली है,
0:40
S… Speaker 1 (0908)
घोड़ा मनुष्य से तेज दौड सकता है,
0:43
S… Speaker 1 (0908)
और सिंह अपनी शक्ति से मनुष्य को
0:46
S… Speaker 1 (0908)
भय भीत कर सकता है,
0:47
S… Speaker 1 (0908)
फिर भी इस धर्ती पर नगर किसने बनाए,
0:49
S… Speaker 1 (0908)
राज्य किसने स्थापित किये,
0:51
S… Speaker 1 (0908)
नदियों पर पुल किसने बनाए,
0:52
S… Speaker 1 (0908)
समुद्रों को पार करने के साधन किसने बनाए,
0:55
S… Speaker 1 (0908)
परवतों को काट कर रास्ते किसने बनाए,
0:57
S… Speaker 1 (0908)
और सामराज्यों का निर्मान किसने किया,
0:59
S… Speaker 1 (0908)
मनुष्य न
1:15
S… Speaker 1 (0908)
जो केवल तलवार चलाना जानता हो। तुम्हें ऐसा योध्धा बनना है जो
1:19
S… Speaker 1 (0908)
अपने मन को भी तलवार की तरह तेज और नियंत्रित रखता हो। चंद्रगुप्त
1:23
S… Speaker 1 (0908)
ने सिर जुका कर कहा,
1:24
S… Speaker 1 (0908)
गुरुदेव,
1:25
S… Speaker 1 (0908)
मैं समझना चाहता हूं कि मन को एकाग्र कैसे किया जाए।
1:29
S… Speaker 1 (0908)
मैं प्रयास करत
1:42
S… Speaker 1 (0908)
आचार्य चानक्य ने कहा यही तो मनुष्य की सबसे बड़ी परीक्षा है
1:46
S… Speaker 1 (0908)
चंद्रगुप्त लक्षे सामने रखना सरल है लेकिन लक्षे के
1:50
S… Speaker 1 (0908)
सामने खड़े रहना कठिन है इच्छा करना सरल है
1:54
S… Speaker 1 (0908)
लेकिन अपनी इच्छाओं को अनुशासन देना कठिन है इसलिए आज
1:58
S… Speaker 1 (0908)
मैं तुम्हें एकाग्रता और सफलता के साथ सिध्धांत बताऊंगा यदि
2:02
S… Speaker 1 (0908)
तुमने इन साथ सिध्धांतों को केवल सुना नहीं बलकि अपने जीवन में उतार
2:06
S… Speaker 1 (0908)
लिया तो तुम्हारा मन धीरे धीरे तुम्
2:21
S… Speaker 1 (0908)
ताकि हमारी आने वाली हर नई वीडियो आप तक पहुँचती रहे। इस
2:25
S… Speaker 1 (0908)
वीडियो को अपने दोस्तों,
2:27
S… Speaker 1 (0908)
मित्रों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें और हमें कमेंट में बताएं
2:31
S… Speaker 1 (0908)
कि आप रोज सुभा कितने बजे उठते हैं। तो चलिए बिना समय बरबाद
2:35
S… Speaker 1 (0908)
किये वीडियो की
2:38
S… Speaker 1 (0908)
पहला सिध्धान्त अपने लक्ष को एक दिशा दो धर्मार्थ काम मोक्षा
2:42
S… Speaker 1 (0908)
नाम यसकोपिन विद्यते अजागस्तव तस जन्म निरर्थकम अर्थाद
2:46
S… Speaker 1 (0908)
जिस मनुष्य के जीवन में धर्म,
2:48
S… Speaker 1 (0908)
अर्थ, काम और मोक्ष जैसे पुरुशार्थों में से कोई भी उद्देश्य नहीं
2:52
S… Speaker 2 (0908)
है �
3:00
S… Speaker 1 (0908)
हर इच्छा को लक्ष मत बनाओ,
3:02
S… Speaker 1 (0908)
लक्ष वह है जिसके लिए तुम अपने आराम का त्याग कर सकते हो,
3:06
S… Speaker 1 (0908)
जिसके लिए कठिनाईयों को सह सकते हो,
3:09
S… Speaker 1 (0908)
और जिसके लिए कई बार अकेले चलने को भी तयार हो,
3:12
S… Speaker 1 (0908)
यदि तुम्हारा लक्ष स्पष्ट नहीं होता है,
3:14
S… Speaker 1 (0908)
तो तुम्हारा मन हर चमक
3:27
S… Speaker 1 (0908)
मनुष्य को यह पता ही नहीं कि उसे जाना कहा है,
3:30
S… Speaker 1 (0908)
वह रास्ते की सुंदर्ता में खो जाता है और मन्जिल तक नहीं पहुँच पाता।
3:34
S… Speaker 1 (0908)
मान लो दो धनुर्धर हैं,
3:36
S… Speaker 1 (0908)
दोनों के हाथ में समान धनुष है,
3:38
S… Speaker 1 (0908)
दोनों के पास समान संख्या में बान हैं और दोनों में समान शक्ती
3:42
S… Speaker 1 (0908)
है, लेक
3:55
S… Speaker 1 (0908)
गुरुदेव जो लक्ष को स्पष्ट देख रहा है,
3:58
S… Speaker 1 (0908)
चानक के बोले यही एकाग्रता है,
4:01
S… Speaker 1 (0908)
जीवन में भी सफलता उसी को मिलती है,
4:03
S… Speaker 1 (0908)
जिसकी दृष्टी अपने लक्ष पर स्थिर रहती है,
4:06
S… Speaker 1 (0908)
आज के मनुष्य के जीवन में यह सिध्धान्त और भी महत्वपूर्ण
4:10
S… Speaker 1 (0908)
हो गया है, यदि �
4:24
S… Speaker 1 (0908)
लेकिन बहुत कम पूर्णताएं होंगी इसी लिए अपने आप से पूछो मुझे
4:28
S… Speaker 1 (0908)
अगले एक वर्ष में क्या प्राप्त करना है अगले पांच वर्षों में मुझे कहां
4:32
S… Speaker 1 (0908)
पहुचना है और आज मुझे कौन सा काम करना है जो मुझे उस मंजिल के एक
4:37
S… Speaker 1 (0908)
कदम करीब ले जाएगा जब �
4:44
S… Speaker 1 (0908)
दूसरा सिध्धान्त,
4:45
S… Speaker 1 (0908)
इंद्रियों को नियंत्रित करो,
4:47
S… Speaker 1 (0908)
क्योंकि भटका हुआ मन लक्षे को नश्ट करता है। चानक्य ने चंद्रगुप्त
4:51
S… Speaker 1 (0908)
से कहा, हे चंद्रगुप्त,
4:52
S… Speaker 1 (0908)
मनुष्य का मन बाहर की वस्तूओं से बहुत जल्दी आकर्शित होता है,
4:56
S… Speaker 1 (0908)
उसे जो दिखाई देता है,
4:57
S… Speaker 1 (0908)
5:00
S… Speaker 2 (0908)
वह उसके पीछे भागता है,
5:01
S… Speaker 2 (0908)
जो सुख मिलता है,
5:02
S… Speaker 2 (0908)
वह उसे बार -बार चाहता है,
5:04
S… Speaker 1 (0908)
समस्या इच्छा होने में नहीं है,
5:06
S… Speaker 2 (0908)
समस्या तब शुरू होती है,
5:08
S… Speaker 2 (0908)
जब इच्छा तुम्हारे निर्णय लेने लगती है,
5:11
S… Speaker 2 (0908)
यहां तुम्हारे दिये हुए विचार,
5:13
S… Speaker 1 (0908)
निद्रा,
5:14
S… Speaker 1 (0908)
भोजन,
5:14
S… Speaker 2 (0908)
भोग और भए क
5:20
S… Speaker 2 (0908)
भय और कामना जैसी प्राकृतिक प्रवृतियां होती हैं। यही बात प्रसिद्ध
5:24
S… Speaker 2 (0908)
नीति श्लोक आहार निद्रभय मैथुनम्च सामान्य में तक पशु
5:28
S… Speaker 2 (0908)
भरन राणाम में भी कही जाती है। इसका उद्देश यह बताना है कि केवल इन
5:33
S… Speaker 2 (0908)
परिये के बाद प्राकृतिक प्रवृतिय
5:46
S… Speaker 2 (0908)
भोग और भय के पीछे जीवन बिताता रहे तो उसकी बुद्धि और क्षमता
5:50
S… Speaker 2 (0908)
का उच्चतम उप्योग नहीं हो पाएगा। तीसरा सिध्धान्त एक समय
5:55
S… Speaker 2 (0908)
में एक काम करो। चंद्रगुप्त ने पूछा गुरुदेव यदि
5:59
S… Speaker 2 (0908)
मनुष्य के पास बहुत सारे काम हों तो क्या करें। �
6:11
S… Speaker 2 (0908)
वह अपनी शक्ति को बांट देता है। उन्होंने एक दीपक उठाया और कहा,
6:15
S… Speaker 2 (0908)
इस दीपक की लौ को देखो। यदि इसकी अगनी एक जगह केंद्रित है,
6:19
S… Speaker 2 (0908)
तो वह प्रकाश देती है। लेकिन यदि तुम उसे चारों और फैला दो,
6:23
S… Speaker 2 (0908)
तो उसकी तीवरता कम हो जाएगी। मनुष्य
6:37
S… Speaker 2 (0908)
युद्ध का अभ्यास कर रहे हो तो केवल अभ्यास करो,
6:40
S… Speaker 2 (0908)
किसी व्यक्ति से महत्व पूर्ण बातचीत कर रहे हो तो केवल उसी बातचीत
6:44
S… Speaker 1 (0908)
में उपस्थित रहो,
6:45
S… Speaker 1 (0908)
भोजन कर रहे हो तो भोजन करो,
6:47
S… Speaker 2 (0908)
विश्राम कर रहे हो तो अपराध बोध के बिना विश्राम करो,
6:50
S… Speaker 1 (0908)
मनुष्य की उर्�
7:05
S… Speaker 2 (0908)
उसमें साधारन व्यक्ति भी असाधारन परिणाम दे सकता है। तुमने देखा
7:09
S… Speaker 2 (0908)
होगा कि कोई साधारन कारीगर वर्षों तक एक ही काम करता है और
7:13
S… Speaker 2 (0908)
अंततह उसी काम में इतना कुशल हो जाता है कि बड़े बड़े विद्वान
7:17
S… Speaker 2 (0908)
भी उससे सीखने लगते। ऐसा इसी लिए नहीं कि उ
7:26
S… Speaker 2 (0908)
आज के जीवन में इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि लोग एक काम
7:30
S… Speaker 2 (0908)
करते हुए दूसरे काम के बारे में सोचते हैं और दूसरे काम के बीच तीसरे
7:34
S… Speaker 2 (0908)
काम की चिंता करते हैं। परिणाम यह होता है कि दिन समाप्त हो जाता
7:38
S… Speaker 2 (0908)
है लेकिन मनुष्य को लगता है कि उसने बहुत कुछ
7:50
S… Speaker 2 (0908)
कुछ समय ऐसा रखो जिसमें केवल एक महत्वपून कार्य हो और बाकी
7:54
S… Speaker 2 (0908)
सभी विचलनों को दूर रखा जाए।
8:15
S… Speaker 2 (0908)
ग्यान प्राप्त करने की इच्छा अच्छी है लेकिन अपने अज्यान को लेकर
8:20
S… Speaker 2 (0908)
इतना चिंतित मत हो कि जो ग्यान तुम्हारे पास है उसका उप्योग
8:24
S… Speaker 2 (0908)
करना ही भूल जाओ अत्यधिक किसी भी बात की बुरी होती है सीखने
8:28
S… Speaker 2 (0908)
की भी यदि सीखना केवल संग्रह बन जाए और कर्म मे
8:36
S… Speaker 2 (0908)
ग्यान का अर्थ यह है कि सही समय पर सही बात को पहचान कर उसका
8:41
S… Speaker 2 (0908)
उप्योग कर सको। एक व्यक्ति के पास सौ ग्रंथों का ग्यान हो सकता है,
8:44
S… Speaker 2 (0908)
लेकिन यदि संकट के समय वह सही निर्णय नहीं ले सकता,
8:48
S… Speaker 2 (0908)
तो उसका ग्यान अभी शक्ति नहीं बना है। दूसरी ओर,
8:52
S… Speaker 2 (0908)
एक साधारण �
9:00
S… Speaker 2 (0908)
यही कारण है कि तुम्हें केवल प्रेरणादायक बातें सुनते नहीं रहना चाहिए।
9:05
S… Speaker 2 (0908)
यदि तुमने सीखा की समय महत्वपूर्ण है,
9:07
S… Speaker 2 (0908)
तो समय की रक्षा करो। यदि सीखा की अनुशासन जरूरी है,
9:11
S… Speaker 2 (0908)
तो अनुशासन अपनाओ। यदि सीखा की गलत संगती से बचना
9:15
S… Speaker 1 (0908)
चाहिए,
9:28
S… Speaker 2 (0908)
पुस्तक में लिखा हुआ ग्यान तुम्हारा नहीं है। जिस ग्यान को तुम
9:32
S… Speaker 2 (0908)
अपने चरित्र और कर्म में उतार लेते हो,
9:34
S… Speaker 2 (0908)
वही वास्तव में तुम्हारा ग्यान है। पांचवा सिध्धान्त आत्मिक बल को
9:38
S… Speaker 2 (0908)
मजबूत करो। अब चानक्य ने चंद्रगुप्त से कहा,
9:41
S… Speaker 2 (0908)
मन को एका�
9:56
S… Speaker 2 (0908)
यदि एक दिन तुम्हें कठिनाई मिले तो क्या तुम अगले दिन उठना बंद कर दोगे
10:00
S… Speaker 2 (0908)
चानक्य बोले यही आत्मिक बल की परीक्षा है मजबूत मनुष्य
10:04
S… Speaker 2 (0908)
वह नहीं जिसके जीवन में कोई कठिनाई नहीं आती मजबूत मनुष्य वह है
10:08
S… Speaker 2 (0908)
जो कठिनाई आने के बाद भी अपन
10:17
S… Speaker 2 (0908)
नास्ती जागरती भयम अर्थात निरंतर प्रयास से दरिद्रता
10:21
S… Speaker 2 (0908)
दूर होती है। साधना से पाप का नाश होता है,
10:24
S… Speaker 2 (0908)
मौन से कलह नहीं होता और जागरुक व्यक्ति भय से बचता है।
10:28
S… Speaker 2 (0908)
यहां उद्योग यानी निरंतर प्रयास हमारे विशय से सीधे जुड़ता है।
10:32
S… Speaker 2 (0908)
एकागरता केव
10:45
S… Speaker 2 (0908)
तुम्हारे भीतर की शक्ती तुम्हे उस दिन दिखाई देगी,
10:48
S… Speaker 2 (0908)
जिस दिन परिस्थितियां तुम्हारे पक्ष में नहीं होंगी,
10:50
S… Speaker 2 (0908)
और फिर भी तुम अपना कर्म करते रहोगे। जब शरीर ठकता है,
10:54
S… Speaker 2 (0908)
तब अनुशासन तुम्हें आगे बढ़ाता है। जब मन डरता है,
10:57
S… Speaker 2 (0908)
तब लक्
11:12
S… Speaker 2 (0908)
चठा सिध्धांत,
11:13
S… Speaker 2 (0908)
अपने मन को मौन और ध्यान से प्रशिक्षित करो,
11:16
S… Speaker 2 (0908)
बंधाय विशय संगो,
11:18
S… Speaker 1 (0908)
मुक्त निर्विशय मन,
11:19
S… Speaker 2 (0908)
मन मनुष्यन कारणम बंध मोक्षो,
11:22
S… Speaker 2 (0908)
अर्थात विशयों में अत्यधिक आसकती मनुष्य को बंधन में डालती
11:26
S… Speaker 2 (0908)
है, और विशयों से अनासकत मन मुक्ती की ओर �
11:38
S… Speaker 2 (0908)
चानक्य ने कहा मौन चंद्रगुप्त ने पूछा क्या केवल चुप रहने से मन
11:42
S… Speaker 2 (0908)
एकाग्र हो जाएगा चानक्य बोले नहीं केवल मुहा बंद रखना
11:46
S… Speaker 2 (0908)
मौन नहीं है मौन का अर्थ है अपने भीतर उठने वाले हर विचार के
11:50
S… Speaker 2 (0908)
पीछे भागना बंद करना जब तुम कुछ समय शांत
12:06
S… Speaker 2 (0908)
आज मनुष्य के सामने सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है,
12:09
S… Speaker 2 (0908)
कि उसके पास काम बहुत अधिक हैं। समस्या यह भी है कि उसके मन में
12:14
S… Speaker 2 (0908)
लगातार उत्तेजनाय बनी रहती हैं। एक सूचना,
12:17
S… Speaker 1 (0908)
फिर दूसरी सूचना,
12:18
S… Speaker 1 (0908)
फिर मनोरंजन,
12:19
S… Speaker 1 (0908)
फिर किसी की राय,
12:20
S… Speaker 1 (0908)
फिर किसी की सफलता,
12:22
S… Speaker 1 (0908)
फिर अपनी �
12:25
S… Speaker 2 (0908)
मन को विश्राम का अवसर ही नहीं मिलता। इसलिए यदि तुम्हे एक आगरता चाहते
12:29
S… Speaker 2 (0908)
हो, तो प्रति दिन कुछ समय ऐसा निकालो,
12:32
S… Speaker 2 (0908)
जिसमें कोई बाहरी उत्तेजना नहों। शांत बैठो,
12:35
S… Speaker 1 (0908)
अपने श्वास को देखो,
12:36
S… Speaker 2 (0908)
अपने लक्ष को याद करो,
12:38
S… Speaker 2 (0908)
अपने दिन के सबसे महत्वप�
12:53
S… Speaker 2 (0908)
लेकिन हर विचार को सत्य मत मानो,
12:55
S… Speaker 2 (0908)
मन कहे कि तुम असफल हो जाओगे,
12:57
S… Speaker 2 (0908)
इसका अर्थ यह नहीं कि तुम असफल होगे,
13:00
S… Speaker 2 (0908)
मन कहे कि तुम दूसरों से पीछे हो,
13:02
S… Speaker 2 (0908)
इसका अर्थ यह नहीं कि तुम्हारी यात्रा समाप्त हो गई,
13:05
S… Speaker 2 (0908)
मन कहे कि आज काम मत करो,
13:07
S… Speaker 2 (0908)
इसका अर्थ यह नहीं कि तुम
13:22
S… Speaker 1 (0908)
सात्वा सिध्धान्त,
13:23
S… Speaker 2 (0908)
रोज स्वयम पर विजय प्राप्त करो,
13:25
S… Speaker 1 (0908)
हे चंद्रगुप्त,
13:26
S… Speaker 2 (0908)
लोग सोचते हैं कि सफलता किसी एक बड़े दिन में मिलती है,
13:30
S… Speaker 2 (0908)
लेकिन सच्चाई यह है कि सफलता रोज के छोटे -छोटे निर्नेयों से बनती
13:34
S… Speaker 2 (0908)
है, तुम एक दिन में महान योध्धा नहीं ब
13:48
S… Speaker 2 (0908)
थोड़ा सा अपनी इच्छाओं पर विजय पालो और थोड़ा सा अपने ध्यान को मजबूत
13:52
S… Speaker 2 (0908)
कर लो तो वर्षों बाद तुम स्वयं को पहचान नहीं पाओगे दोस्तों
13:56
S… Speaker 2 (0908)
ये थे चानक के नीती के वे साथ सिध्धांत जो आपके मन को एकाग्र
14:00
S… Speaker 2 (0908)
करने और आपके जीवन को बदलने

ይህ ትርክት በ AI (አቶማቲክ የንግግር ማወቅ) የተፈጠረ ነው. ስህተቶች ሊኖሩ ይችላሉ - ለጥብቅ ጥቅም በመጀመሪያው ድምፅ ላይ ይመልከቱ የAI ፖሊሲ

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