0907

8:02 2 发言者 2 章次 章 次 91 分部分会议

章次 章 次

  1. 0:00
    章章章 章章 章 次 第一章 章 第一章 一章 1: एक समय की बात है, जंगल में आचार्य चानक्य ने चंद्रगुप्त से कहा, हे चंद्रगुप्त क्या तुम्हें पता है इस दुनिया में मूर्ख की कोई कमी नहीं है, मूर्ख व्यक्ति अमीर तो बन जाता है, लेकिन वह धन का संचय नहीं कर पाता और उसे गरीब बनने में � कंजूस बनने से क्या होगा अगर व्यक्ति धन कमा रहा है तो उसे अपने उपर खर्चना ही पड़ेगा अपनी सुविधाओं और जरूरतों को पूरी करने के लिए आखिर वह धन तो खर्चना ही पड़ेगा चानक के मुस्कुराए और बोले वह अलग विशय है लेकिन आज मैं तुम्हें जो ग्यान देने वाला हूँ, वह अनमोल है। यह धन का एक ऐसा गुप्त रहस्य है, जो बहुत ही कम लोग और विद्वान ही जानते हैं। लेकिन जो इस धन के गुप्त रहस्य को समझ गया, उसे जिन्दगी बदलने में देर नहीं लगती। चानक लोगों को दावत देगा, अपने मित्रों को बुलाएगा और अपनी सभी जरूरतों को सब से पहले पूरा करेगा जिसकी उसे जरूरत है। वह अपनी जूठी प्रतिभाओं को बढ़ाने का प्रयास करेगा, उसे लगेगा कि संसार को दिखाना आवश्यक है कि उसके पास धन इसे कहां लगाया जाए और वह अपनी जरूरत की चीजों को खरीदने में ही सारा धन खर्च कर देता है लेकिन अगर यही हजार स्वर्ण मुद्राएं किसी बुद्धिमान व्यापारी के हाथ में दे दी जाएं तो वह क्या करेगा वह उन्हें खर्च नहीं करेगा बलकि उन् तो तुम्हें एक बात समझ में आ जाएगी कि धन कभी भी खर्च करने का विशय नहीं होता, जरूरत पूरी करनी और चीज है. 267s · Speaker 1

    एक समय की बात है, जंगल में आचार्य चानक्य ने चंद्रगुप्त से कहा, हे चंद्रगुप्त क्या तुम्हें पता है इस दुनिया में मूर्ख की कोई कमी नहीं है, मूर्ख व्यक्ति अमीर तो बन जाता है, लेकिन वह धन का संचय नहीं कर पाता और उसे गरीब बनने में � कंजूस बनने से…

  2. 4:27
    章章章 章章 章 次 第一章 章 第一章 一章 2: दि अकसर अमीर दिखने की कोशिश करता है और अमीर व्यक्ति अकसर साधारण दिखने की कोशिश करता है क्योंकि गरीब व्यक्ति सम्मान खरीदना चाहता है और अमीर व्यक्ति स्वतंत्रता बचाना चाहता है तीसरा सिध्धान्त यह है कि लोकलाज और दिखावटी परंपराओ क्योंकि उनकी कमाई कम होती है बलकि इसलिए होते हैं क्योंकि समाज को खुश करने में अपनी कमाई लुटा देते हैं एक किसान ने जीवन भर थोड़ा थोड़ा करके धन बचाया लेकिन जब उसकी बेटी की शादी आई तो लोगों ने क्या कहा बड़ा पंडाल लगाओ, ज लेकिन कर्ज चुकाने में उसे कई साल लग गए जिन लोगों के लिए उसने इतना खर्च किया था उन में से कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया मूर्ख व्यक्ति आज की वाहवाही खरीदता है लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति अपने आने वाले कल के लिए सुरक् चौथा सिध्धान्त है कि जूठी प्रशंसा और सस्ती लोग प्रियता खरीदने के लिए धन मत खर्च करो। कुछ लोग हर जगह पैसा खर्च करते हैं, दोस्तों की दावतें और महंगे उपहार देते हैं, सिर्फ इसलिए कि लोग उन्हें बड़ा समझें और उनकी तारीफ तो वे मित्र उनसे दूर होने लगते हैं। उन्हें समझ में आता है कि वह दोस्ती नहीं थी, वे सिर्फ उसके पैसों का आनंद ले रहे थे। दिखावटी पन के साथ हमेशा दिखावे की तारीफ करने वाले लोग ही होते हैं, जो धन के आकरशन के साथ चिपके रहते हैं और धन से खरीदी गई प्रशंसा कुछ समय के लिए होती है, लेकिन अच्छे चरित्र से कमाया गया सम्मान जीवन भर रहता है। पाँचवा और सबसे महत्वपूर्ण सिध्धान्त यह है कि अंत में मनुष्य को स्वयम ही अपना सहारा बनना पड़ता है। जीवन में अगर तु मेहनत करो और उसमें लगे रहो. 215s · Speaker 2

    दि अकसर अमीर दिखने की कोशिश करता है और अमीर व्यक्ति अकसर साधारण दिखने की कोशिश करता है क्योंकि गरीब व्यक्ति सम्मान खरीदना चाहता है और अमीर व्यक्ति स्वतंत्रता बचाना चाहता है तीसरा सिध्धान्त यह है कि लोकलाज और दिखावटी परंपराओ क्योंकि उनकी कमा…