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38:45 1 Locutores 8 Capitolium 550 Segmenta

Capitolium

  1. 0:00

    नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं उस विशय पर जिसने हर इंसान के मन को कभी न कभी जगजोरा है उस सवाल पर जिसका जवाब हर कोई अपने अपने तरीके से खोजता रहता है उस सच्चाई पर जो हमारे समाज ने हमें सिखाई तो बहुत है लेकिन शायद प और वह विशय है धन…

  2. 5:00

    मन से नहीं और जब मन अनुपस्थित होता है तो जीवन का जादू खो जाता है सच्चा धन केवल वही कमा सकता है जिसने भीतर की सम्रिध्धी को छुआ है जिसने जाना है कि पैसा का कोई लक्ष नहीं बलकि एक दरपन है जो तुम्हारे भीतर की स्थिती को दिखाता है अगर तुम भीतर से …

  3. 10:12
    Capitolium 3: पहले खुद को व्यवस्थित करो। फिर संसार अपने आप व्यवस्थित हो जाएगा क्योंकि जो भीतर जीत लेता है उसे बाहर जीतने की आवशक्ता नहीं रहती उसके कदम अपने आप सही दिशा में चलते हैं उसकी मेहनत भी फलदाई बनती है उसका हर कार्य सम्रिद्धि का कारण बनता है जीवन में बुद्धिमत्ता सबसे बड़ा निवेश है, मेहनत शरीर की शक्ति है, पर बुद्धिमत्ता आत्मा की और आत्मा से किया गया कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता, जो भीतर से जागा हुआ है, उसकी हर योजना, हर निर्णय में, ब्रह्मांड उसका साथ देता है, ब बंधन नहीं, इसलिए याद रखो, दिमाग से काम करना कोई तकनीक नहीं, यह एक साधना है, यह जीवन को गहराई से देखने की कला है, यह निर्णय लेने की वहक्षमता है, जो हडबडी से नहीं शांत ध्यान से जन्म लेती है, और जब यह ध्यान तुम्हारे भीतर उतरता मेहनत का अर्थ केवल शरीर का परिश्रम नहीं बलकि बुद्धी की सजगता भी है, जो व्यक्ति मेहनत करता है पर सोचता नहीं. 287s · Speaker 1

    पहले खुद को व्यवस्थित करो। फिर संसार अपने आप व्यवस्थित हो जाएगा क्योंकि जो भीतर जीत लेता है उसे बाहर जीतने की आवशक्ता नहीं रहती उसके कदम अपने आप सही दिशा में चलते हैं उसकी मेहनत भी फलदाई बनती है उसका हर कार्य सम्रिद्धि का कारण बनता है जीवन …

  4. 15:15

    जब तुम्हारे भीतर पैदा होता है। जब तुम अपने काम को समझ से करते हो। वह आंतरिक संतुलन ही बाहर समृध्धी बनकर जलकता है, मेहनत से शरीर मजबूत होता है, पर समझ से भाग्य बनता है, और जब दोनों का मेल हो जाए, जब मेहनत में विवेक का साथ हो, तब जीवन अपनी पू…

  5. 20:28

    तो यह प्रवाह सहज बना रहता है। धन का रुकना अक्सर मन के रुकने का संकेत होता है। जब मन स्थिर नहीं रहता तो बाहर की स्थितियां भी अस्थिर हो जाती हैं और जब मन शांत हो जाता है तो संसार भी उस शांती को प्रतिबिंबित करता है। यही कारण है कि शांत � अचेत …

  6. 25:28

    जब तुम उसे गलत नहीं समझते, जब तुम उसे केवल भौतिक नहीं मानते, जब तुम उसे स्रिजन के साधन के रूप में देखते हो, जिसने पैसे को समझ लिया, उसने जीवन को समझ लिया, क्योंकि पैसा केवल तुम्हारी आंतरिक स्थिती का प्रतिबिंब है, अगर भ अगर तुम्हें लगता है क…

  7. 30:32

    नहीं पैसे का अर्थ केवल नोटों या संपत्ती में नहीं बलकि उस स्वतंत्रता में है जो वह प्रदान कर सकता है धन तुम्हें अवसर देता है लेकिन दिशा तुम्हें देनी होती है अगर तुम्हारे भीतर दिशा नहीं है, तो पैसा तुम्हें भटकाने लगता है, अचेत व्यक्ति जब अमीर …

  8. 35:38
    Capitolium 8: जिस तरह बिजली केवल तारों में बहती नहीं बलकि उसके पीछे अंदेखी शक्ती होती है वैसे ही पैसा भी केवल मुद्रा नहीं बलकि तुम्हारे भीतर की उर्जा का प्रतिफल है जो व्यक्ति भीतर से स्थिर है उसकी उर्जा शान्त और केंद्रित होती है और वही उर् तो तुम चाहे कितनी भी महनत करो, परिणाम टुकडों में मिलते हैं। पैसा उर्जा है और उर्जा वहीं जाती है जहां प्रवाह खुला है। अगर तुम्हारा मन भय में बंध है, अपराध बोध में उल्जा है या असुरक्षा में कैद है, तो यह प्रवाह रुक जाता है ध्यान से देखो, जब तुम किसी को कुछ देते हो और भीतर से सच्चे मन से आनंद अनुभव करते हो, तो तुम्हें भीतर हलकापन महसूस होता है। ये हलकापन ही समरिद्धी का संकेत है, क्योंकि समरिद्धी का अर्थ है उर्जा का प्रवाह। जो बांट सकता है वही प्राप्त भी कर सकता है जो रोकता है वह रुक जाता है पैसे की उर्जा का नियम भी यही कहता है अगर तुम केवल संग्रह करते रहोगे तो वह उर्जा स्थिर हो जाएगी और जहां स्थिरता है वहां जीवन नहीं प्रवाह ही जीवन है इसलिए सच् देखो धन का प्रवाह हमेशा विश्वास से जुड़ा होता है। अगर तुम भीतर से विश्वास करते हो कि मेरे पास पर्याप्त है तो तुम्हारी तरंगे विस्तृत होती है। और ब्रह्मांड उस विश्वास का प्रत्युत्तर देता है। पर अगर तुम्हारे भीतर यह � क्योंकि ब्रह्मांड तुम्हारे विश्वासों के अनुसार चलता है, तुम्हारी वास्तविक्ता के अनुसार नहीं, ध्यान दो, अमीर व्यक्ती अक्सर इसलिए और अमीर होता है, क्योंकि उसका विश्वास धन के प्रती सकारात्मक है, वह अवसर देखता है, जोखिम लेता पैसा उसकी पहुँच से नहीं, बलकि उसकी सोच से दूर होता है। उर्जा का यह खेल बहुत सूक्ष्म है। अगर तुम अपने भीतर हर दिन यह भावना जगाओ की मैं पूर्ण हूँ, मैं समर्थ हूँ, मैं योग्य हूँ, मैं जीवन के प्रवाह के साथ हूँ, तो तुम और इसी विज्ञान को समझने के लिए ही हमें भीतर की यात्रा करनी होती है, बाहर की नहीं. 186s · Speaker 1

    जिस तरह बिजली केवल तारों में बहती नहीं बलकि उसके पीछे अंदेखी शक्ती होती है वैसे ही पैसा भी केवल मुद्रा नहीं बलकि तुम्हारे भीतर की उर्जा का प्रतिफल है जो व्यक्ति भीतर से स्थिर है उसकी उर्जा शान्त और केंद्रित होती है और वही उर् तो तुम चाहे कि…