AUDIO-2026-05-21-13-02-11

0:47 2 Locutores 1 Capitolium 13 Segmenta

Capitolium

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    अस्तित्व जिन्दगी बस अपने जिन्दा होने का एहसास धूनती है, अपनी मामूली वकात भुलाने को एक नजरे खास धूनती है, बंद दर्वाजों के पीछे मन खुला आस्मान धूनता है, खुले आस्मान के नीचे वो अपना बंद मकान धूनता है, मुढ मुढ कर मुस हर मोड पर रुक कर जाने कौन स…