sarika miss 15

7:22 2 غږوونکي 2 څپرکي 134 برخې

څپرکي

  1. 0:00
    څپرکی 1: कल्पना कीजिए, आपके शहर में एक प्रिंटिंग प्रेस है, वो प्रेस 24 सों घंटे चलती है, कागज आता है, स्याही लगती है, और नोट बनते हैं, करोडों, अरबों, खरबों, ये प्रेस कभी नहीं रुकती, और इस प्रेस के मालिक वो कितना कमाते हैं, अगर आप सोचत इतना चतुर तरीका कि आम आदमी को पता भी नहीं चलता, तो सवाल है जो पैसा चापते हैं, वो खुद कैसे कमाते हैं, और सबसे बड़ा सवाल क्या वो वाकई अमीर हैं या सिर्फ दिखावा है, ये कोई साजिश नहीं है, ये अर्थ व्यवस्था का सबसे बड़ा खेल है, आप सोचेंगे कैसे, अगर मैं पैसे चापने की मशीन चलाता हूँ, तो मैं दुनिया का सबसे अमीर आदमी बन जाऊंगा, लेकिन ऐसा नहीं होता, क्योंकि पैसा चापना और पैसा कमाना दो अलग चीजें हैं, जो पैसा चापते हैं, वो एक सेवा करते हैं, और उस सेवा का हर देश का Central Bank, भारत में RBI, अमेरिका में Federal Reserve, यूरोप में ECB, ये संस्थाएं तय करती हैं कितना पैसा चापना है, कब चापना है, और किसको देना है, लेकिन ये संस्थाएं खुद पैसा नहीं रखती, वो सरकार को पैसा देती है, सरकार उस पैसे से सडके बनाती है, स्कूल � जिस पर लिखा होता है हमें इतने पैसे उधार चाहिए हम ब्याज सहित चुकाएंगे तो Central Bank के पास Bonds आ गए और सरकार के पास पैसा आ गया अब Central Bank के पास जो Bonds हैं उन पर ब्याज मिलता है ये ब्याज ये Central Bank की कमाई है लेकिन ये ब्याज वो सरकार देती है यानि Tax के पैसे स सरकार उसे लेती है, सरकार खर्च करती है, और फिर सरकार टैक्स वसूलती है आपसे, आपकी कमाई से, आपकी खरीदारी से, आपके पेट्रोल से, आपके बिजली के बिल से, और उसी टैक्स से वो सेंट्रल बैंक को ब्याज चुकाती है, यानि आपके टैक्स से सेंट्रल बैं क्योंकि Central Bank सिर्फ ब्याज से नहीं कमाता, वो एक और तरीके से कमाता है, वो तरीका है पैसे की कीमत, जब Central Bank पैसा चापता है, तो वो पैसे की सप्लाई बढ़ाता है, और जब सप्लाई बढ़ती है, तो पैसे की वैल्यू घड़ती है, यानि महंगाई बढ़ती है, अब सोच और ब्याज दरें बढ़ने पर पुराने बॉंड्स की कीमत घटती है, नए बॉंड्स की कीमत बढ़ती है, सेंट्रल बैंक वो पुराने बॉंड्स बेचता है, नए बॉंड्स खरीदता है, और इस फर्क से वो करोडों कमाता है, ये है असली खेल, पैसा चापना एक मशीन का क RBI वालों के पास असीमित पैसा है. 292s · Speaker 1

    कल्पना कीजिए, आपके शहर में एक प्रिंटिंग प्रेस है, वो प्रेस 24 सों घंटे चलती है, कागज आता है, स्याही लगती है, और नोट बनते हैं, करोडों, अरबों, खरबों, ये प्रेस कभी नहीं रुकती, और इस प्रेस के मालिक वो कितना कमाते हैं, अगर आप सोचत इतना चतुर तरीक…

  2. 5:05
    څپرکی 2: इस ताकत से वो अर्थ व्यवस्था चलाते हैं, मंदी आती है तो पैसा चापते हैं, महंगाई बढ़ती है तो पैसा कम चापते हैं, बैंक डूपते हैं तो पैसा चापते हैं और बचाते हैं, ये खेल ये चलता रहता है, लेकिन यहां एक बड़ी समस्या है, जब बहुत ज्य जो पैसा चापते हैं वो तो अपनी जिंदगी में अमीर नहीं बनते लेकिन जो पैसे की सपलाई को कंट्रोल करते हैं वो अपनी संपत्ती बढ़ाते हैं कैसे वो जानते हैं कि पैसा कब छपेगा कब महंगाई बढ़ेगी कब ब्याजदरें बदलेंगी वो अपना निवेश � जबकि आम आदमी वो सोचता है महंगाई बढ़ गई, मेरी बचत घट गई, वो नहीं जानता कि महंगाई किसी के लिए मुनाफ़ा भी होती है, तो अब आप जानते हैं, जो लोग पैसा चापते हैं, वो खुद उस पैसे से अमीर नहीं बनते, वो सरकार को पैसा देते हैं, सर और जो लोग इस सिस्टम को समझते हैं, वो अपनी संपत्ती बढ़ाते हैं. 136s · Speaker 1

    इस ताकत से वो अर्थ व्यवस्था चलाते हैं, मंदी आती है तो पैसा चापते हैं, महंगाई बढ़ती है तो पैसा कम चापते हैं, बैंक डूपते हैं तो पैसा चापते हैं और बचाते हैं, ये खेल ये चलता रहता है, लेकिन यहां एक बड़ी समस्या है, जब बहुत ज्य जो पैसा चापते हैं व…