Nur angezeigt
0:00
S… Speaker 1 (0910)
नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं उस विशय पर जिसने
0:04
S… Speaker 1 (0910)
हर इंसान के मन को कभी न कभी जगजोरा है उस सवाल पर
0:08
S… Speaker 1 (0910)
जिसका जवाब हर कोई अपने अपने तरीके से खोजता रहता
0:12
S… Speaker 1 (0910)
है उस सच्चाई पर जो हमारे समाज ने हमें सिखाई तो बहुत है लेकिन
0:17
S… Speaker 1 (0910)
शायद प
0:19
S… Speaker 1 (0910)
और वह विशय है धन,
0:20
S… Speaker 1 (0910)
पैसा,
0:21
S… Speaker 1 (0910)
सम्रिध्धी और उसके पीछे छिपा हुआ असली रहस्य। लेकिन
0:26
S… Speaker 1 (0910)
इससे पहले कि मैं आपको इस गहरे रहस्य में ले जाऊं। मैं आपसे
0:30
S… Speaker 1 (0910)
एक छोटा सा अनुरोद करना चाहता हूं। अगर आपको यह बातचीत पसंद आए,
0:34
S… Speaker 1 (0910)
अगर यह आपके वि�
0:48
S… Speaker 1 (0910)
और अगर आप इस तरह की गहरी बातचीत को आगे भी सुनना चाहते हैं
0:52
S… Speaker 1 (0910)
तो चैनल को सबस्क्राइब करना बिल्कुल मत भूलिए क्योंकि आज की
0:56
S… Speaker 1 (0910)
यह बातचीत शायद आपके जीवन की दिशा बदलने वाली साबित हो तो
1:00
S… Speaker 1 (0910)
चलिए शुरू करते हैं कभी गहराई से सोचा है कि इनस
1:06
S… Speaker 1 (0910)
सुभह से शाम तक हजारों विचारों के बीच थकता हुआ तूटता हुआ सिर्फ
1:11
S… Speaker 1 (0910)
एक चीज के पीछे भागता है और वह है पैसा वह मानता
1:15
S… Speaker 1 (0910)
है कि पैसा मेहनत से बनता है जितना पसीना गिरेगा उतना भाग्य चमकेगा
1:20
S… Speaker 1 (0910)
पर क्या सच में ऐसा है क्या केवल मेहनत ही धन का मार्ग
1:24
S… Speaker 1 (0910)
है
1:34
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन ऐसा नहीं है यह सच है कि मेहनत जरूरी है
1:38
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन मेहनत ही सब कुछ नहीं है पैसा मेहनत से नहीं समझ
1:42
S… Speaker 1 (0910)
से बनता है यह किसी की बाहों की ताकत नहीं मन की गहराई
1:46
S… Speaker 1 (0910)
से उपजता है मेहनत एक साधन है पर धन एक परिणाम
1:51
S… Speaker 1 (0910)
है और परिणाम हमेशा चेतना पर निर्भर करता है
1:55
S… Speaker 1 (0910)
जिस व्यक्ति का मन सोया हुआ है उसकी मेहनत भी आंतरिक
1:59
S… Speaker 1 (0910)
रूप से खोखली होती है वह चाहे जितना काम करे
2:03
S… Speaker 1 (0910)
भीतर से खाली रहेगा लेकिन जो व्यक्ति जागा हुआ है उसका
2:08
S… Speaker 1 (0910)
एक छोटा सा कदम भी जादू कर देता है उसकी उपस्थिती उसकी
2:12
S… Speaker 1 (0910)
सोच उसकी दिशा सब कुछ मूल
2:22
S… Speaker 1 (0910)
ध्यान हीन व्यक्ति मेहनत करता है,
2:24
S… Speaker 1 (0910)
पर उसका ध्यान भय में,
2:25
S… Speaker 1 (0910)
लालच में या तुलना में बंधा होता है,
2:28
S… Speaker 1 (0910)
वह केवल काम नहीं कर रहा होता,
2:30
S… Speaker 1 (0910)
वह भाग रहा होता है,
2:32
S… Speaker 1 (0910)
अपने भीतर की कमी से,
2:34
S… Speaker 1 (0910)
अपनी असंतुष्टी से,
2:35
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन जब कोई व्यक्ति काम को ध्यान बना लेता है,
2:38
S… Speaker 1 (0910)
जब हर क
2:51
S… Speaker 1 (0910)
पर वास्तव में यह तुम्हारी चेतना का परिणाम है। जितना तुम्हारा
2:55
S… Speaker 1 (0910)
मन स्पष्ट होगा,
2:56
S… Speaker 1 (0910)
जितनी तुम्हारी दृष्टी शांत होगी,
2:58
S… Speaker 1 (0910)
उतनी ही उर्जा तुम्हारे माध्यम से बहकर चीजों को सुव्यवस्थित
3:02
S… Speaker 1 (0910)
करेगी। जब मन असंतुलित होता है तो मेहनत भी बि�
3:19
S… Speaker 1 (0910)
और यह समझ केवल बुद्धी की नहीं होती,
3:21
S… Speaker 1 (0910)
यह भीतर की जागरूकता से आती है,
3:24
S… Speaker 1 (0910)
एक जागरित व्यक्ती कुछ भी करे,
3:26
S… Speaker 1 (0910)
वह दुकान चलाए या खेत जोते,
3:28
S… Speaker 1 (0910)
उसका हर कार्य ध्यान से भरा होता है,
3:30
S… Speaker 1 (0910)
और ध्यान में की गई हर क्रिया सौ गुना फल देती है,
3:34
S… Speaker 1 (0910)
कभी गौर करना,
3:35
S… Speaker 1 (0910)
कुछ �
3:47
S… Speaker 1 (0910)
कि पहले ने मेहनत से ज्यादा दिमाग से काम किया और दूसरे ने
3:52
S… Speaker 1 (0910)
केवल मेहनत को ही धर्म मान लिया मेहनत की अपनी जगह है लेकिन
3:56
S… Speaker 1 (0910)
अगर उसमें दिशा नहीं विवेक नहीं जाग रूकता नहीं तो वह अंधी
4:00
S… Speaker 1 (0910)
दौड बन जाती है
4:01
S… Speaker 1 (0910)
धन एक विज्ञान है,
4:03
S… Speaker 1 (0910)
अगर तुम इसे ध्यान से समझो,
4:05
S… Speaker 1 (0910)
तो यह तुम्हें भीतर से बदल देगा,
4:07
S… Speaker 1 (0910)
यह केवल कमाने की बात नहीं जीने की कला है,
4:10
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम भीतर से स्थिर हो जाते हो,
4:12
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम्हारा मन शांती में टिकता है,
4:15
S… Speaker 1 (0910)
तो हर निर्णय सही दिशा में जाता है,
4:18
S… Speaker 1 (0910)
तुम अ
4:29
S… Speaker 1 (0910)
ध्यान देना,
4:30
S… Speaker 1 (0910)
मेहनत और बुद्धी का फर्क उसी तरह है,
4:32
S… Speaker 1 (0910)
जैसे अंधे और देखने वाले का फर्क होता है,
4:35
S… Speaker 1 (0910)
अंधा भी चल सकता है,
4:36
S… Speaker 1 (0910)
पर ठोकर खाता रहेगा,
4:38
S… Speaker 1 (0910)
देखने वाला धीरे चलता है,
4:40
S… Speaker 1 (0910)
पर सही चलता है,
4:41
S… Speaker 1 (0910)
और अंत में वही आगे निकलता है,
4:43
S… Speaker 1 (0910)
धर्म को लेकर समाज ने जो भ्रम
4:58
S… Speaker 1 (0910)
उन्होंने शरीर से काम किया
5:00
S… Speaker 1 (0910)
मन से नहीं और जब मन अनुपस्थित होता है तो जीवन का जादू
5:04
S… Speaker 1 (0910)
खो जाता है। सच्चा धन केवल वही कमा सकता है जिसने
5:08
S… Speaker 1 (0910)
भीतर की सम्रिध्धी को छुआ है।
5:10
S… Speaker 1 (0910)
जिसने जाना है कि पैसा का कोई लक्ष नहीं बलकि एक
5:14
S… Speaker 1 (0910)
दरपन है जो तुम्हारे भीतर की स्थिती को दिखाता है अगर
5:18
S… Speaker 1 (0910)
तुम भीतर से डर में जीते हो तो तुम्हारे निर्णय डर से चलेंगे अगर
5:22
S… Speaker 1 (0910)
तुम भीतर से लालच में जीते हो तो तुम्हारा धन भी तुम्हें बांधे
5:39
S… Speaker 1 (0910)
तब ही तुम जान पाओगे कि धन वास्तव में क्या है और क्यों वह केवल
5:43
S… Speaker 1 (0910)
महनत से नहीं बलकि दिमाग से बनता है जब हम कहते हैं कि
5:47
S… Speaker 1 (0910)
पैसा महनत से नहीं दिमाग से बनता है तो हमारा मतलब चालाकी
5:51
S… Speaker 1 (0910)
से नहीं होता क्योंकि चालाक इंसान भी अंततह दुखी रहता है उसका
5:56
S… Speaker 1 (0910)
धन भी
6:07
S… Speaker 1 (0910)
हर निर्णय को स्पष्टता से लेना,
6:09
S… Speaker 1 (0910)
हर अवसर को भीतर की शांती से समझना,
6:11
S… Speaker 1 (0910)
एक अचेत व्यक्ति का मन हमेशा जल्दबाजी में होता है,
6:15
S… Speaker 1 (0910)
वह बिना देखे निर्णय लेता है,
6:17
S… Speaker 1 (0910)
बिना समझे प्रतिक्रिया करता है,
6:19
S… Speaker 1 (0910)
वह सोचता है कि वह कुछ कर रहा है,
6:22
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन वास्तव में उसके �
6:30
S… Speaker 1 (0910)
और इसी लिए उसकी मेहनत चाहे जितनी भी हो,
6:33
S… Speaker 1 (0910)
कभी स्थाई परिणाम नहीं देती। जब तुम भीतर से शांत होते हो,
6:37
S… Speaker 1 (0910)
तो तुम्हारे भीतर एक अद्रिश्य बुद्धी जागती है,
6:40
S… Speaker 1 (0910)
वह तुम्हें दिखाती है कि कहां उर्जा लगानी है और कहां नहीं।
6:45
S… Speaker 1 (0910)
यही बुद्धी अ
6:52
S… Speaker 1 (0910)
वह देख सकता है जो बाकी नहीं देख पाते वह समझ सकता
6:57
S… Speaker 1 (0910)
है जो बाकी चूक जाते हैं यही समझ पैसा पैदा करती है
7:01
S… Speaker 1 (0910)
धन का निर्मान केवल बाहर नहीं होता उसका मूल भीतर की
7:05
S… Speaker 1 (0910)
स्थिती में होता है अगर मन बिखरा हुआ है तो बाहर का संसार भी
7:09
S… Speaker 1 (0910)
बिखरा रहेगा और अगर मन क
7:19
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि धन तुम्हारे भीतर के विकास का परिणाम है,
7:22
S… Speaker 1 (0910)
जैसे पेड़ फल तभी देता है,
7:24
S… Speaker 1 (0910)
जब उसकी जड़ें गहरी हो। वैसे ही जीवन भी धन तभी देता है,
7:27
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम्हारी समझ गहरी हो। मेहनत शाखाएं हैं,
7:31
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन समझ जड़ है। और अगर जड़ कमजोर है,
7:34
S… Speaker 1 (0910)
तो �
7:48
S… Speaker 1 (0910)
वह निर्णय लेता है,
7:49
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन अधीरता से नहीं। उसकी हर क्रिया में एक प्रकार की लाय
7:53
S… Speaker 1 (0910)
होती है। जैसे कोई संगीत चल रहा हो,
7:56
S… Speaker 1 (0910)
जैसे कोई नृत्य हो रहा हो,
7:58
S… Speaker 1 (0910)
और यही आंत्रिक संगीत उसकी बाहरी समृध्धि बनता है। पैसा
8:02
S… Speaker 1 (0910)
सिर्फ लेंदेन का माध्यम नहीं है। यह �
8:10
S… Speaker 1 (0910)
एक बेचैन व्यक्ति धन पाभी ले तो वह टिकता नहीं,
8:13
S… Speaker 1 (0910)
जैसे बाल्टी में छेद हो,
8:15
S… Speaker 1 (0910)
पानी भरने से पहले ही निकल जाता है,
8:17
S… Speaker 1 (0910)
ऐसा व्यक्ति चाहे कितना भी कमाए,
8:20
S… Speaker 1 (0910)
उसकी कमी बनी रहती है,
8:21
S… Speaker 1 (0910)
पर जिस व्यक्ति ने अपने भीतर के छेद भर दिये हैं,
8:25
S… Speaker 1 (0910)
जो शांत,
8:26
S… Speaker 1 (0910)
केंद्रित और
8:35
S… Speaker 1 (0910)
दिमाग से काम करने का अर्थ है खुद को और अपने जीवन को गहराई से
8:39
S… Speaker 1 (0910)
देखना जब तुम किसी काम को शुरू करते हो तो पहले अपने भीतर
8:44
S… Speaker 1 (0910)
जहां को यह काम तुम्हारे स्वभाव से मेल खाता है या नहीं
8:48
S… Speaker 1 (0910)
अगर नहीं तो चाहे कितनी भी मेहनत करो वह तुम्हे सुख नहीं देगा
8:52
S… Speaker 1 (0910)
और जब सुख नहीं है तो स्रिजन नहीं है जो काम आनंद
8:56
S… Speaker 1 (0910)
से नहीं किया जाता वह केवल श्रम है और जो काम ध्यान से
9:00
S… Speaker 1 (0910)
आनंद से किया जाता है वही धन का बीज बनता है बुद्धिमान
9:04
S… Speaker 1 (0910)
व्यक्ति समझता
9:15
S… Speaker 1 (0910)
और जब मन शांत हो जाए,
9:17
S… Speaker 1 (0910)
तो थोड़ा भी परियाप्त है,
9:19
S… Speaker 1 (0910)
यह समझ एक अलग तरह की स्वतंत्रता देती है,
9:22
S… Speaker 1 (0910)
जिसमें तुम पैसे के पीछे नहीं भागते,
9:25
S… Speaker 1 (0910)
बलकि पैसा तुम्हारे पास आता है,
9:27
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि अब तुम उसके दास नहीं स्वामी हो,
9:30
S… Speaker 1 (0910)
स्मरण रखना,
9:31
S… Speaker 1 (0910)
पैसा उसी के
9:42
S… Speaker 1 (0910)
9:45
S… Speaker 1 (0910)
अपर इपक्व व्यक्ति पैसा पाकर और दुखी हो जाता है,
9:48
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि वह उसे आनंद से नहीं,
9:51
S… Speaker 1 (0910)
भय से पकड़ता है,
9:52
S… Speaker 1 (0910)
और भय कभी सुरक्षा नहीं बनाता,
9:55
S… Speaker 1 (0910)
इसलिए यदि तुम धन्वान बनना चाहते हो,
9:57
S… Speaker 1 (0910)
तो पहले यह जानो की तुम्हारी चेत्व
10:12
S… Speaker 1 (0910)
पहले खुद को व्यवस्थित करो,
10:14
S… Speaker 1 (0910)
फिर संसार अपने आप व्यवस्थित हो जाएगा,
10:16
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि जो भीतर जीत लेता है,
10:19
S… Speaker 1 (0910)
उसे बाहर जीतने की आवशक्ता नहीं रहती,
10:21
S… Speaker 1 (0910)
उसके कदम अपने आप सही दिशा में चलते हैं,
10:25
S… Speaker 1 (0910)
उसकी मेहनत भी फलदाई बनती है
10:28
S… Speaker 1 (0910)
उसका हर कार्य सम्रिद्धी का कारण बनता है
10:31
S… Speaker 1 (0910)
जीवन में बुद्धिमत्ता सबसे बड़ा निवेश है,
10:33
S… Speaker 1 (0910)
मेहनत शरीर की शक्ति है,
10:35
S… Speaker 1 (0910)
पर बुद्धिमत्ता आत्मा की और आत्मा से किया गया कार्य कभी
10:40
S… Speaker 1 (0910)
व्यर्थ नहीं जाता,
10:41
S… Speaker 1 (0910)
जो भीतर से जागा हुआ है,
10:43
S… Speaker 1 (0910)
उसकी हर योजना,
10:44
S… Speaker 1 (0910)
हर निर्णय में ब्रह्मांड उसका साथ देता है,
10:47
S… Speaker 1 (0910)
ब�
11:00
S… Speaker 1 (0910)
बंधन नहीं इसलिए याद रखो दिमाग से काम करना
11:04
S… Speaker 1 (0910)
कोई तकनीक नहीं यह एक साधना है यह जीवन को गहराई
11:08
S… Speaker 1 (0910)
से देखने की कला है यह निर्णय लेने की वह क्षमता है जो
11:13
S… Speaker 1 (0910)
हडबडी से नहीं शांत ध्यान से जन्म लेती है और जब यह ध्यान तुम्हारे
11:17
S… Speaker 1 (0910)
भीतर उतरता है तो प
11:23
S… Speaker 1 (0910)
जैसे जीवन की कोई स्वाभाविक धारा,
11:25
S… Speaker 1 (0910)
हम बचपन से सुनते आएं हैं कि मेहनत ही सफलता की कुंजी है,
11:30
S… Speaker 1 (0910)
यह बात आधी सच है और आधा भ्रम है,
11:33
S… Speaker 1 (0910)
मेहनत जरूरी है लेकिन अंधी मेहनत नहीं,
11:36
S… Speaker 1 (0910)
बिना दिशा की मेहनत वैसी है,
11:38
S… Speaker 1 (0910)
जैसे कोई नाविक बिना दिशा के समुद्र में �
11:50
S… Speaker 1 (0910)
जो व्यक्ति मेहनत करता है पर सोचता नहीं,
11:53
S… Speaker 1 (0910)
वह पत्थर ढोने वाले मजदूर की तरह है,
11:55
S… Speaker 1 (0910)
रोज वही काम,
11:57
S… Speaker 1 (0910)
वही संघर्ष,
11:58
S… Speaker 1 (0910)
वही थकावट और जो व्यक्ति मेहनत के साथ सोचता है,
12:01
S… Speaker 1 (0910)
वह कलाकार की तरह है,
12:03
S… Speaker 1 (0910)
वही प्रयास पर उसमें संगीत है,
12:05
S… Speaker 1 (0910)
उसमें लए है,
12:06
S… Speaker 1 (0910)
उसमें स्रिजन है,
12:07
S… Speaker 1 (0910)
12:18
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि जब काम आनंद बन जाता है तब मेहनत का अनुभव नहीं रहता तब
12:22
S… Speaker 1 (0910)
तुम जो भी करते हो वह ध्यान बन जाता है यही रहस्य है कि मेहनत
12:26
S… Speaker 1 (0910)
को ध्यान में कैसे बदला जाए जिस दिन तुम अपने काम से प्रेम करने लगोगे
12:30
S… Speaker 1 (0910)
उसी दिन तुम्हारी मेहनत बुद्धी में �
12:39
S… Speaker 1 (0910)
तुम अपनी उर्जा को व्यर्थ नहीं बहाओगे यही वह बिंदु है जहां
12:43
S… Speaker 1 (0910)
साधारन इंसान और असाधारन इंसान के बीच का अंतर स्पष्ठ होता है
12:47
S… Speaker 1 (0910)
साधारन व्यक्ति काम करता है क्योंकि
12:54
S… Speaker 1 (0910)
वह उसे जीना चाहता है बिना समझ की मेहनत हमेशा तनाव
12:58
S… Speaker 1 (0910)
पैदा करती है ऐसे व्यक
13:08
S… Speaker 1 (0910)
पैसा नहीं है आराम नहीं है और वही शिकायतें उसके
13:12
S… Speaker 1 (0910)
भीतर की उर्जा को नश्ट कर देती हैं जब मन बोजिल हो तो मेहनत
13:16
S… Speaker 1 (0910)
थकावट में बदल जाती है समझदार व्यक्ति काम करता है लेकिन
13:20
S… Speaker 1 (0910)
उसे बोज नहीं बनाता वह काम के भीतर आनंद ढूंडता है वह
13:25
S… Speaker 1 (0910)
हर क्षण का रस ले
13:30
S… Speaker 1 (0910)
और जब तुम इस दृष्टी से काम करते हो,
13:32
S… Speaker 1 (0910)
तो तुम केवल पैसा नहीं कमाते,
13:34
S… Speaker 1 (0910)
तुम जीवन कमाते हो,
13:36
S… Speaker 1 (0910)
कभी अपने आसपास देखो,
13:37
S… Speaker 1 (0910)
जो लोग अपने काम से प्रेम करते हैं,
13:40
S… Speaker 1 (0910)
वे ठकते नहीं,
13:41
S… Speaker 1 (0910)
उन्हें लंबे घंटे काम करने में कोई शिकायत नहीं होती,
13:45
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि उनके लिए क
13:54
S… Speaker 1 (0910)
यहां से समझो कि मेहनत का मूल्य इस बात पर निर्भर करता
13:58
S… Speaker 1 (0910)
है कि वह किस चेतना से की जा रही है वही काम जब ध्यान
14:02
S… Speaker 1 (0910)
पूर्वक किया जाता है तो चमतकार बन जाता है और जब बिना
14:06
S… Speaker 1 (0910)
ध्यान के किया जाता है तो नीरस बन जाता है अगर कोई व्यक्ति
14:11
S… Speaker 1 (0910)
पूरे दिन काम करे लेकिन �
14:22
S… Speaker 1 (0910)
और जहां कृतग्यता नहीं वहां स्रिजन नहीं धन उसी व्यक्ति के पास
14:26
S… Speaker 1 (0910)
आता है जो काम को स्रिजन में बदलता है जो अपनी मेहनत में कला का
14:30
S… Speaker 1 (0910)
स्वाद डालता है जो समझता है कि मैं केवल पैसे के लिए नहीं
14:34
S… Speaker 1 (0910)
अपनी उर्जा के पूर्ण उपयोग के लिए काम कर रहा हूं यह
14:38
S… Speaker 1 (0910)
14:49
S… Speaker 1 (0910)
खोते खोते भीतर एक शांती का अनुभव करते हो। यही
14:53
S… Speaker 1 (0910)
शांती तुम्हें नई दिशा देती है। स्मरण रखना मेहनत
14:57
S… Speaker 1 (0910)
से ठकान आती है।
15:00
S… Speaker 1 (0910)
से सफूर्ती आती है और जब मेहनत ध्यान बन जाती
15:04
S… Speaker 1 (0910)
है तो वह तुम्हें ठकाती नहीं तुम्हें और जीवन्त बनाती है
15:08
S… Speaker 1 (0910)
यह वही बिंदु है जहां से सच्चा धन शुरू होता है धन
15:12
S… Speaker 1 (0910)
का अर्थ केवल नोट नहीं है बलकि वह संतुलन है जो तुम्हारे
15:17
S… Speaker 1 (0910)
भीतर पैदा होता है ज�
15:21
S… Speaker 1 (0910)
वह आंतरिक संतुलन ही बाहर समृध्धी बनकर जलकता है,
15:24
S… Speaker 1 (0910)
मेहनत से शरीर मजबूत होता है,
15:27
S… Speaker 1 (0910)
पर समझ से भाग्य बनता है,
15:29
S… Speaker 1 (0910)
और जब दोनों का मेल हो जाए,
15:31
S… Speaker 1 (0910)
जब मेहनत में विवेक का साथ हो,
15:33
S… Speaker 1 (0910)
तब जीवन अपनी पूरी क्षमता से खिलता है,
15:36
S… Speaker 1 (0910)
तब तुम्हारी हर कोशिश सफल होती
15:48
S… Speaker 1 (0910)
वह देखता है कि कौन क्या कर रहा है और उसी रास्ते पर चल पड़ता
15:52
S… Speaker 1 (0910)
है पर जो व्यक्ति समझ से चलता है वह अपनी राह बनाता है
15:56
S… Speaker 1 (0910)
उसकी दिशा दूसरों से अलग होती है और यही भिन्नता उसे
16:00
S… Speaker 1 (0910)
असली सम्रिध्धि तक ले जाती है जो व्यक्ति अपने भीतर के स्वर
16:04
S… Speaker 1 (0910)
को सुनन
16:17
S… Speaker 1 (0910)
और कहा नहीं, यही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
16:20
S… Speaker 1 (0910)
जीवन में मेहनत करना सुन्दर है,
16:22
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन उससे भी सुन्दर है,
16:24
S… Speaker 1 (0910)
सजग होकर मेहनत करना,
16:26
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि सजगता ही मेहनत को धन में बदलती है,
16:29
S… Speaker 1 (0910)
यह वह जादू है,
16:30
S… Speaker 1 (0910)
जिसे समझने वाला कभी गरीब नहीं रहता,
16:33
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि उसने अपनी चेतना की गहराई को छू लिया है,
16:36
S… Speaker 1 (0910)
जब चेतना का
16:48
S… Speaker 1 (0910)
वे शिक्षक बन जाती हैं और जो व्यक्ति हर चुनौती से सीखता
16:52
S… Speaker 1 (0910)
है उसका हर संघर्ष सफलता का पायदान बन जाता
16:56
S… Speaker 1 (0910)
है
16:57
S… Speaker 1 (0910)
यही है सच्चा रहस्य कि मेहनत को जागरूकता के साथ
17:01
S… Speaker 1 (0910)
जोड़ो, मेहनत को ध्यान बना दो,
17:03
S… Speaker 1 (0910)
तब तुम्हारा हर प्रयास स्वर्ण में बदल जाएगा,
17:06
S… Speaker 1 (0910)
पैसा केवल नोट नहीं है,
17:08
S… Speaker 1 (0910)
केवल सिक्के नहीं है,
17:10
S… Speaker 1 (0910)
नहीं किसी बैंक के खाते में दर्ज कोई संख्या है,
17:13
S… Speaker 1 (0910)
पैसा उर्जा है,
17:24
S… Speaker 1 (0910)
जहां संतुलन है,
17:25
S… Speaker 1 (0910)
जहां सौंदर्य है,
17:26
S… Speaker 1 (0910)
जहां समझ है,
17:28
S… Speaker 1 (0910)
यह संसार उर्जा का विशाल जाल है,
17:30
S… Speaker 1 (0910)
हर विचार,
17:32
S… Speaker 1 (0910)
हर भावना,
17:33
S… Speaker 1 (0910)
हर शब्द एक तरंग है और पैसा भी उसी उर्जा
17:37
S… Speaker 1 (0910)
का एक रूप है,
17:38
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम्हारे विचार संतुलित होते हैं,
17:40
S… Speaker 1 (0910)
तुम्हारी भावनाएं निर्मल होती हैं औ
17:47
S… Speaker 1 (0910)
तालमेल में आ जाते हो जिसे हम सम्रिद्धी कहते हैं,
17:50
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन जब मन अशांत है,
17:51
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम्हारे भीतर भय,
17:53
S… Speaker 1 (0910)
लालच,
17:54
S… Speaker 1 (0910)
असुरक्षा या तुलना है,
17:56
S… Speaker 1 (0910)
तब यह प्रवाह रुक जाता है,
17:58
S… Speaker 1 (0910)
पैसा ऐसे व्यक्ति के पास आता है,
18:00
S… Speaker 1 (0910)
पर टिकता नहीं,
18:02
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि उसका मन छिद्रों से भरा ह
18:11
S… Speaker 1 (0910)
समझदार व्यक्ति धन को पकड़ता नहीं बलकि उसके साथ नृत्य
18:15
S… Speaker 1 (0910)
करता है वह जानता है कि पैसा ठहरने की चीज नहीं चलने
18:20
S… Speaker 1 (0910)
की चीज है जितना तुम उसे बांधोगे उतना वह ठहरना छोड़ेगा
18:24
S… Speaker 1 (0910)
जितना तुम उसे सहज प्रवाह में रखोगे उतना वह लोटेगा
18:29
S… Speaker 1 (0910)
बढ़े
18:32
S… Speaker 1 (0910)
धन का असली रहस्य देने और लेने के बीच के संतुलन में छिपा है,
18:36
S… Speaker 1 (0910)
जिसने केवल लेने की कला सीखी है,
18:38
S… Speaker 1 (0910)
वह अंत तक हो देता है,
18:40
S… Speaker 1 (0910)
और जिसने देने की कला सीखी है,
18:42
S… Speaker 1 (0910)
उसके पास देने के बाद भी कमी नहीं होती,
18:44
S… Speaker 1 (0910)
यह विरोधा भास नहीं,
18:46
S… Speaker 1 (0910)
यह अस्तित्व का नियम है,
18:48
S… Speaker 1 (0910)
उर्जा हमे
19:01
S… Speaker 1 (0910)
जो उसे जीवन के लिए,
19:03
S… Speaker 1 (0910)
स्रिजन के लिए,
19:04
S… Speaker 1 (0910)
आनंद के लिए लगाता है,
19:05
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन जो व्यक्ति पैसे को भय में जमा करता है,
19:08
S… Speaker 1 (0910)
उसका धन धीरे,
19:10
S… Speaker 1 (0910)
धीरे उसके ही भीतर जड़ बन जाता है,
19:12
S… Speaker 1 (0910)
उसका मन कठोर हो जाता है,
19:14
S… Speaker 1 (0910)
उसकी आँखें असुरक्षा से भर जाती है,
19:17
S… Speaker 1 (0910)
वह जीना भूल जात
19:29
S… Speaker 1 (0910)
जिसके भीतर देने की प्रसन्नता है और पाने की कृतग्यता है जो
19:34
S… Speaker 1 (0910)
जानता है कि यह सारा जीवन एक नृत्य है कभी तुम देते हो कभी
19:38
S… Speaker 1 (0910)
लेते हो और यही दोनों का संतुलन सच्ची सम्रिध्धी है
19:42
S… Speaker 1 (0910)
धन एक प्रकार का दर्पन है। यह तुम्हारे भीतर की स्थिती को
19:46
S… Speaker 1 (0910)
बाहर दिखाता है। अगर तुम भीतर से कमी में जी रहे हो,
19:50
S… Speaker 1 (0910)
तो तुम्हारे जीवन में कितनी भी संपत्ति आ जाए,
19:53
S… Speaker 1 (0910)
वह पर्याप्त नहीं लगेगी,
19:55
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि कमी मन में है। और अगर तुम भीतर से पूर्�
20:00
S… Speaker 1 (0910)
हे हो तो थोड़ा भी बहुत लगता है क्योंकि तब तुम्हारी चेतना
20:04
S… Speaker 1 (0910)
भरपूर है और जहां भरपूरता है वहां ब्रमांड और
20:08
S… Speaker 1 (0910)
भी देता है धन के प्रवाह को महसूस करना एक ध्यान की तरह है
20:12
S… Speaker 1 (0910)
इसमें कोई जल्दबाजी नहीं होती कोई तुलना नहीं होती तुम
20:16
S… Speaker 1 (0910)
बस देखते
20:28
S… Speaker 1 (0910)
तो यह प्रवाह सहज बना रहता है। धन का रुकना अक्सर
20:32
S… Speaker 1 (0910)
मन के रुकने का संकेत होता है। जब मन स्थिर नहीं रहता तो
20:37
S… Speaker 1 (0910)
बाहर की स्थितियां भी अस्थिर हो जाती हैं और जब मन शांत हो जाता
20:41
S… Speaker 1 (0910)
है तो संसार भी उस शांती को प्रतिबिंबित करता है। यही
20:45
S… Speaker 1 (0910)
कारण है कि शांत �
20:58
S… Speaker 1 (0910)
अचेत व्यक्ति इस शक्ति का उपयोग नहीं करता बलकि यह शक्ति
21:02
S… Speaker 1 (0910)
उसी को उपयोग करने लगती है वह धन का मालिक नहीं गुलाम
21:06
S… Speaker 1 (0910)
बन जाता है और जागरूक व्यक्ति धन का स्वामी बन जाता है क्योंकि
21:11
S… Speaker 1 (0910)
वह उसे साधन के रूप में देखता है साध्य के रूप में नहीं
21:53
S… Speaker 1 (0910)
तुम जितने जागरूख हो,
21:55
S… Speaker 1 (0910)
उतनी ही तुम्हारी उर्जा सूक्ष्म होती जाती है,
21:57
S… Speaker 1 (0910)
और सूक्ष्म उर्जा ही अवसरों को पहचानती है,
22:00
S… Speaker 1 (0910)
रिष्टों को समझती है,
22:02
S… Speaker 1 (0910)
दिशा को पकड़ती है,
22:03
S… Speaker 1 (0910)
यही वह अद्रिश्य शक्ती है,
22:05
S… Speaker 1 (0910)
जिससे धन अपने आप आकरशित होता है,
22:08
S… Speaker 1 (0910)
धन का कोई स्थाई ठिकाना नहीं,
22:10
S… Speaker 1 (0910)
वह च
22:23
S… Speaker 1 (0910)
वह मन की परिपक्वता का फल है,
22:25
S… Speaker 1 (0910)
मेहनत उसका एक माध्यम है,
22:27
S… Speaker 1 (0910)
पर असली कुंजी चेतना है,
22:29
S… Speaker 1 (0910)
जो भीतर से शांत है,
22:30
S… Speaker 1 (0910)
वही बाहर के संसार को सुलजा सकता है,
22:33
S… Speaker 1 (0910)
जो भीतर से भरा हुआ है,
22:34
S… Speaker 1 (0910)
वही बाहर धन का अनुभव कर सकता है,
22:37
S… Speaker 1 (0910)
और जो भीतर से प्रेम से भरा है,
22:40
S… Speaker 1 (0910)
उसके लिए पैसा भी
22:51
S… Speaker 1 (0910)
यह ब्रमांड तय नहीं करता यह तुम्हारी चेतना तय करती
22:55
S… Speaker 1 (0910)
है अगर तुम्हारे भीतर पूर्णता है तो संसार तुम्हारे चारों
23:00
S… Speaker 1 (0910)
और खिल उठता है अगर तुम्हारे भीतर भय है तो संसार
23:04
S… Speaker 1 (0910)
तुम्हारे चारों और सिकुड जाता है
23:06
S… Speaker 1 (0910)
इसलिए असली काम भीतर का है बाहर का नहीं धन
23:10
S… Speaker 1 (0910)
का रहस्य केवल जानने से नहीं खुलता उसे महसूस करना पड़ता है जब
23:15
S… Speaker 1 (0910)
तुम अपने विचारों अपने व्यवहार अपने भावों में सजग हो जाते
23:19
S… Speaker 1 (0910)
हो तो धीरे धीरे तुम देखोगे कि पैसा तुम्हारे जीवन में अधिक
23:36
S… Speaker 1 (0910)
उसी उपस्थिती में तुम्हारे कर्म अर्थपूर्ण बनते हैं और अर्थपूर्ण
23:40
S… Speaker 1 (0910)
कर्म ही सम्रिधी बनाते हैं हर चीज की शुरुआत मन से होती है जो
23:45
S… Speaker 1 (0910)
तुम्हारे भीतर उगता है वही तुम्हारे बाहर आकार लेता है पैसा
23:49
S… Speaker 1 (0910)
भी इससे अलग नहीं
23:50
S… Speaker 1 (0910)
धन की शुरुवात किसी व्यापार,
23:52
S… Speaker 1 (0910)
नौकरी या अवसर से नहीं होती,
23:54
S… Speaker 1 (0910)
वह तुम्हारे विचारों की मिट्टी में उगता है,
23:57
S… Speaker 1 (0910)
और अगर तुम्हारी मिट्टी डर,
23:59
S… Speaker 1 (0910)
शक और कमी से भरी है,
24:01
S… Speaker 1 (0910)
तो चाहे तुम उस पर कितना भी परिश्रम का जल डालो,
24:04
S… Speaker 1 (0910)
कुछ नहीं उगेगा,
24:06
S… Speaker 1 (0910)
अभाव क
24:15
S… Speaker 1 (0910)
यह वाक के दिखने में छोटे लगते हैं,
24:18
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन इनके पीछे जो कमपन है,
24:20
S… Speaker 1 (0910)
वह ऐसी उर्जा पैदा करता है,
24:22
S… Speaker 1 (0910)
जो सम्रिध्धि को दूर धकेल देता है,
24:24
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि ब्रह्मांड किसी की भाशा नहीं सुनता,
24:27
S… Speaker 1 (0910)
वह तुम्हारी तरंगों को सुनता है,
24:29
S… Speaker 1 (0910)
और अगर तुम्हारी तरंगे �
24:43
S… Speaker 1 (0910)
यह चेतना का विज्ञान है अगर तुम अपने मन को सम्रिद्धी के प्रति
24:47
S… Speaker 1 (0910)
खोल दो तो तुम देखोगे कि जीवन में ऐसे अवसर आने लगते हैं जो
24:52
S… Speaker 1 (0910)
पहले अद्रिश्य थे वे हमेशा थे पर तुम्हारी द्रिश्टी पर
24:56
S… Speaker 1 (0910)
अभाव का परदा पड़ा हुआ था जो व्यक्ति मा
25:00
S… Speaker 1 (0910)
वह हमेशा संगर्ष में रहेगा और जो व्यक्ति मानता है
25:04
S… Speaker 1 (0910)
कि धन अनंत है वह सहज रूप से आकरशित करेगा यह
25:08
S… Speaker 1 (0910)
फर्क भीतर की धारणा का है ब्रह्मांड में संसाधन असीम है सूरज
25:12
S… Speaker 1 (0910)
सबको रौशनी देता है हवा सबको समान रूप से छूती है धरती
25:16
S… Speaker 1 (0910)
सबको समान अवसर देती ह
25:28
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम उसे गलत नहीं समझते,
25:30
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम उसे केवल भौतिक नहीं मानते,
25:33
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम उसे स्रिजन के साधन के रूप में देखते हो,
25:36
S… Speaker 1 (0910)
जिसने पैसे को समझ लिया,
25:38
S… Speaker 1 (0910)
उसने जीवन को समझ लिया,
25:40
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि पैसा केवल तुम्हारी आंतरिक स्थिती का प्रतिबिंब है,
25:43
S… Speaker 1 (0910)
अगर भ
25:50
S… Speaker 1 (0910)
अगर तुम्हें लगता है कि अमीर होना स्वार्थ है तो तुम्हारा मन
25:54
S… Speaker 1 (0910)
तुम्हें अमीर होने से रोकेगा और अगर तुम मानते हो कि पैसा
25:58
S… Speaker 1 (0910)
तुम्हारे जीवन में प्रेम,
26:00
S… Speaker 1 (0910)
अवसर और स्वतंत्रता ला सकता है तो ब्रह्मान तुम्हें वही देता
26:04
S… Speaker 1 (0910)
है सम्रिधी मानसिक अवस्था
26:13
S… Speaker 1 (0910)
मैं जीवन की संपन्नता के योग्य हूँ,
26:15
S… Speaker 1 (0910)
तो यह भावना ब्रह्मांड में फैलती है,
26:17
S… Speaker 1 (0910)
और फिर वही उर्जा अवसरों के रूप में लोटती है,
26:21
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन यह केवल शब्दों से नहीं होता,
26:23
S… Speaker 1 (0910)
यह विश्वास से होता है,
26:25
S… Speaker 1 (0910)
विश्वास का अर्थ है,
26:26
S… Speaker 1 (0910)
बिना देखे भरोसा करना,
26:28
S… Speaker 1 (0910)
बिना �
26:40
S… Speaker 1 (0910)
अभाव की मानसिक्ता हमेशा तुलना से पैदा होती है,
26:43
S… Speaker 1 (0910)
जब तुम देखते हो कि कोई और तुम से आगे है,
26:47
S… Speaker 1 (0910)
और तुम्हारे भीतर इरश्या जन्म लेती है,
26:50
S… Speaker 1 (0910)
तो तुम अपनी ही उर्जा घटा देते हो,
26:53
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि इरश्या यह घोशना है कि मेरे पास नहीं है,
26:56
S… Speaker 1 (0910)
और ब्रह्मांड उ
27:00
S… Speaker 1 (0910)
इसलिए जो व्यक्ति सचमुच सम्रिद्ध होना चाहता है उसे तुलना
27:04
S… Speaker 1 (0910)
से मुक्त होना होगा उसे हर उस विचार से मुक्त होना होगा जो
27:09
S… Speaker 1 (0910)
कहता है मैं कमजोर हूँ,
27:10
S… Speaker 1 (0910)
मैं पीछे हूँ,
27:11
S… Speaker 1 (0910)
मेरे पास नहीं है जब तुम यह मानना छोड़ देते हो कि तुम्हारे
27:16
S… Speaker 1 (0910)
पास कुछ नहीं है त
27:28
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि कृतग्यता का अर्थ है मैं पहले से भरपूर हूँ और जहां
27:32
S… Speaker 1 (0910)
भरपूरता है वहां ब्रह्मांड और भरता है यह जीवन एक प्रतिबिंब
27:36
S… Speaker 1 (0910)
है अगर तुम कमी दिखाओगे तो कमी लोटेगी अगर तुम
27:41
S… Speaker 1 (0910)
सम्रिध्धी दिखाओगे तो सम्रिध्धी लोटेगी इसलिए �
27:56
S… Speaker 1 (0910)
कि पैसा तुम्हारे जीवन में कैसे बहेगा,
27:59
S… Speaker 1 (0910)
जो व्यक्ति अपने पैसे को प्रेम से देखता है,
28:01
S… Speaker 1 (0910)
उसका पैसा बढ़ता है,
28:03
S… Speaker 1 (0910)
जो व्यक्ति अपने पैसे से ड़ता है,
28:05
S… Speaker 1 (0910)
उसका पैसा घटता है,
28:07
S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि धन भी जीवित उर्जा है,
28:09
S… Speaker 1 (0910)
वह वही जाता है जहां उसे सम्मान मिलता है,
28:12
S… Speaker 1 (0910)
धन क
28:24
S… Speaker 1 (0910)
इसलिए अपने विचारों की जांच करो,
28:26
S… Speaker 1 (0910)
अपने भीतर के हर नकारात्मक विश्वास को देखो,
28:29
S… Speaker 1 (0910)
जैसे पैसा कठिनाई से मिलता है,
28:31
S… Speaker 1 (0910)
मेरे पास कभी पर्याप्त नहीं होगा,
28:34
S… Speaker 1 (0910)
मैं अमीर नहीं बन सकता,
28:36
S… Speaker 1 (0910)
फिर इन विचारों को प्रेम पूर्वक बदलो,
28:38
S… Speaker 1 (0910)
अपने मन से कहो,
28:40
S… Speaker 1 (0910)
पैसा मेरे �
28:48
S… Speaker 1 (0910)
इन शब्दों में शक्ति है यह तुम्हारे मन को नए पैटर्न में
28:52
S… Speaker 1 (0910)
ढालते हैं और धीरे धीरे तुम्हारी वास्तविक्ता बदलने लगती है
28:56
S… Speaker 1 (0910)
लेकिन ध्यान रहे यह केवल शब्दों का खेल नहीं यह भीतर
29:01
S… Speaker 1 (0910)
के परिवर्तन की यात्रा है तुम्हें अपने भीतर उस उर्जा को मह
29:16
S… Speaker 1 (0910)
पैसा उस व्यक्ति के पास आता है जो भीतर से प्रसन्न है क्योंकि
29:20
S… Speaker 1 (0910)
प्रसन्नता आकर्शन है और जहां आकर्शन है वहां सम्रिध्धी
29:24
S… Speaker 1 (0910)
स्वतह बहती है जो व्यक्ति भीतर से दुखी है,
29:27
S… Speaker 1 (0910)
भयभीत है,
29:28
S… Speaker 1 (0910)
असंतुष्ट है उसका मन हर चीज को खोने का डर पालता है
29:32
S… Speaker 1 (0910)
और जो डरता है वह
29:44
S… Speaker 1 (0910)
पैसा बुरा नहीं है लेकिन अचेत व्यक्ति के हाथों में वह जहर
29:49
S… Speaker 1 (0910)
बन जाता है। जैसे तलवार किसी संत के हाथ में सुरक्षा बनती
29:53
S… Speaker 1 (0910)
है और किसी मूर्ख के हाथ में विनाश वैसे ही धन भी बुद्धिमत्ता
29:58
S… Speaker 1 (0910)
के साथ वर्दान है और मूर्ख तलवार किसी संत के हाथ में सुरक
30:21
S… Speaker 1 (0910)
अगर यह चला गया तो क्या होगा और यह भय ही उसके
30:25
S… Speaker 1 (0910)
सारे सुख को निगल लेता है
30:27
S… Speaker 1 (0910)
जो बुद्धिमान है वह जानता है कि पैसा साधन है साध्य
30:32
S… Speaker 1 (0910)
नहीं पैसे का अर्थ केवल नोटों या संपत्ती में नहीं बलकि
30:36
S… Speaker 1 (0910)
उस स्वतंत्रता में है जो वह प्रदान कर सकता है धन तुम्हें
30:41
S… Speaker 1 (0910)
अवसर देता है लेकिन दिशा तुम्हें देनी होती है
30:44
S… Speaker 1 (0910)
अगर तुम्हारे भीतर दिशा नहीं है,
30:46
S… Speaker 1 (0910)
तो पैसा तुम्हें भटकाने लगता है,
30:48
S… Speaker 1 (0910)
अचेत व्यक्ति जब अमीर होता है,
30:51
S… Speaker 1 (0910)
तो उसका मन और अधिक लालची और अधिक असंतुष्ट हो जाता
30:55
S… Speaker 1 (0910)
है, क्योंकि उसका धन उसके भीतर की खाली जगह को नहीं भर सकता,
30:59
S… Speaker 1 (0910)
वह बाहर बहुत कु
31:11
S… Speaker 1 (0910)
और अंत में उसे लगता है मैंने सब पा लिया फिर भी कुछ
31:15
S… Speaker 1 (0910)
कमी है लेकिन जो व्यक्ति सजग है जो अपने भीतर जागा
31:19
S… Speaker 1 (0910)
हुआ है वह जानता है कि पैसा केवल जीवन की एक परत है वह
31:24
S… Speaker 1 (0910)
उसका उपयोग करता है पर उसके अधीन नहीं होता वह पैसे
31:28
S… Speaker 1 (0910)
को अपने हाथ में रखता है अ
31:37
S… Speaker 1 (0910)
बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि असली संपत्ति बाहर नहीं भीतर है,
31:41
S… Speaker 1 (0910)
जो भीतर से धनी है,
31:43
S… Speaker 1 (0910)
जिसकी चेतना सम्रिद्ध है,
31:44
S… Speaker 1 (0910)
जिसका मन शांत है,
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S… Speaker 1 (0910)
जिसकी आत्मा प्रेम से भरी है,
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S… Speaker 1 (0910)
उसके पास चाहे थोड़ा भी हो,
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S… Speaker 1 (0910)
वह परियाप्त होता है,
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S… Speaker 1 (0910)
और जो भीतर से दरिद्र है,
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S… Speaker 1 (0910)
जो ख
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S… Speaker 1 (0910)
एक वे जो पैसा कमाते हैं ताकि वे कुछ बन सके और दूसरे
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S… Speaker 1 (0910)
वे जो पहले कुछ बन जाते हैं फिर पैसा उनके पीछे आता है पहला
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S… Speaker 1 (0910)
वर्ग हमेशा भागता रहता है क्योंकि उसका होना अधूरा है
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S… Speaker 1 (0910)
दूसरा वर्ग शांत रहता है क्योंकि उसने पहले अपने अस्तित्व
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S… Speaker 1 (0910)
को पूर्ण किया है और धन उसकी पूर्णता की स्वाभाविक छाया
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S… Speaker 1 (0910)
बन कराता है। सच्ची बुध्धिमत्ता यह है कि तुम पैसा कमाओ
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S… Speaker 1 (0910)
पर उसमें खो न जाओ। तुम धन का उपयोग करो पर वह तुम्
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S… Speaker 1 (0910)
लेकिन जैसे ही वह तुम्हारे निर्णेयों पर अधिकार करने लगे वह तुम्हारा
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S… Speaker 1 (0910)
मालिक बन जाता है। देखो जीवन की विडंबना यह है कि लोग सारा
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S… Speaker 1 (0910)
जीवन पैसा कमाने में लगा देते हैं और जब पैसा आता है तब वे
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S… Speaker 1 (0910)
जीना भूल जाते हैं। वे कहते हैं थोड़ा औ
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S… Speaker 1 (0910)
धन उनके जीवन का केंद्र बन जाता है और जीवन खुद हाशिये
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S… Speaker 1 (0910)
पर चला जाता है जो व्यक्ति बुद्धिमान है वह जानता है कि
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S… Speaker 1 (0910)
धन केवल एक प्रवा है
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S… Speaker 1 (0910)
जैसे नदी बहती है वैसे ही पैसा बहना चाहिए,
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S… Speaker 1 (0910)
अगर तुम उसे रोक लोगे तो वह सड़ जाएगा,
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S… Speaker 1 (0910)
अगर तुम उसे बांटोगे तो वह और बढ़ेगा,
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S… Speaker 1 (0910)
धन को साजह करना उसकी उर्जा को जीवित रखना है,
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S… Speaker 1 (0910)
और यह साजह करना केवल दान में नहीं,
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S… Speaker 1 (0910)
बलकि अपने कार्य म
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S… Speaker 1 (0910)
वह केवल दूर भगाता है,
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S… Speaker 1 (0910)
जो व्यक्ति सहज है,
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S… Speaker 1 (0910)
शांत है,
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S… Speaker 1 (0910)
अपने काम में प्रेम से लगा है,
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S… Speaker 1 (0910)
उसके पास धन स्वयम आता है,
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S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि वह अपने कार्य को पूजा की तरह करता है,
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S… Speaker 1 (0910)
और जब काम ध्यान बन जाता है,
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S… Speaker 1 (0910)
तब सम्रिध्धी उसका आशीरवाद बन कर बरस्ती है,
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S… Speaker 1 (0910)
धन को �
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S… Speaker 1 (0910)
तुम काम करो आनंद से,
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S… Speaker 1 (0910)
बिना किसी भय के,
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S… Speaker 1 (0910)
बिना किसी लालच के,
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S… Speaker 1 (0910)
ऐसे व्यक्ति का हर प्रयास फूल की तरह खिलता है,
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S… Speaker 1 (0910)
क्योंकि उसमें तनाव नहीं सहजता है,
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S… Speaker 1 (0910)
और यही सहजता ब्रह्मांड की भाशा है,
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S… Speaker 1 (0910)
जहां प्रयास बिना संघर्ष के हो,
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S… Speaker 1 (0910)
वहां कृपा अपने आप उतरती है,
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S… Speaker 1 (0910)
अगर तुम्हें लगता है कि पैसा सब कुछ है तो तुम अभी अंधकार में हो। अगर

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